जनता जहां से चाहेगी, वहां से उतरेंगे : शिबू
जागरण कार्यालय, जमशेदपुर : मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने कहा है कि राज्य में पंचायत चुनाव शीघ्र कराए जाएंगे। इसके लिए सरकार ने अपने स्तर पर पूरी तैयारी कर ली है। संभावना जताई कि आगामी तीन महीने में पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच जाएगी और चुनाव कराने का रास्ता साफ हो जाएगा।
सोमवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष सह विधायक चंपई सोरेन के पुत्र के विवाह समारोह में शिरकत करने राजनगर के जिलिंजगोड़ा गांव पहुंचे शिबू सोरेन ने इस दौरान पेसा कानून के तहत पंचायत चुनाव कराये जाने के बाबत पूछे गये सवाल को टालते हुए सिर्फ इतना कहा कि जो जनहित में होगा, उसी आधार पर सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ही राज्य में पंचायत चुनाव कराए जाएंगे।
इस दौरान चंपई के पुत्र सिमल सोरेन व पुत्रवधु जयमनी हेम्ब्रम को आशीर्वाद देने के पश्चात मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव लड़ने के मसले पर कहा कि इस बार वे कहीं से भी लड़ें जीत सुनिश्चित है। वे किसी भी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं, जनता जहां से उन्हें उतारना चाहेगी, वे वहीं से चुनाव लड़ेंगे। मुख्यमंत्री हेलीकाप्टर से सीधे चंपई सोरेन के गांव जिलिंजगोड़ा (राजनगर) पहुंचे थे। इस दौरान गांव में सुरक्षा के दृष्टिकोण से व्यापक इंतजाम किये गये थे।
चंपई के पुत्र व पुत्रवधु को पुष्पगुच्छ भेंट करने के बाद उन्होंने उनके सफल वैवाहिक जीवन की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री का आदिवासी परंपरा के मुताबिक स्वागत किया गया। पैर धोकर उनकी खातिर की गई तो पीली धोती भेंट कर शादी समारोह में पारंपरिक रूप से शामिल भी किया गया। मुश्किल से आधे घंटे के लिए जिलिंजगोड़ा में रुके शिबू सोरेन ने शादी समारोह में मजाक ही मजाक में चंपई को अपने बुरे वक्त का साथी बताते हुए हमेशा उनका ऋणी रहने की बात कही। शादी समारोह में मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री रघुवर दास व विधायक हेमंत सोरेन भी जिलिंजगोड़ा पहुंचे थे।
Wednesday, March 31, 2010
Friday, March 26, 2010
jamshedpur - सच हो सकता मेट्रो ट्रेन का सपना
-शहर के इंजीनियर संभाल चुके हैं दिल्ली मेट्रो की कमान
जमशेदपुर : शहर में मेट्रो ट्रेन का सपना सच हो सकता है। सरकार ने अपनी तरफ से इस बाबत पहल कर दी है। 11 मार्च को बाकायदा राज्य झारखंड सरकार की ओर से केंद्रीय शहरी विकास मंत्री जयपाल एस. रेड्डी को एक पत्र लिख कर राज्य में इस बहुप्रतीक्षित मेट्रो रेल सेवा को शुरू करने हेतु सहयोग करने का अनुरोध किया गया है तो वहीं दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड से भी राज्य में मेट्रो रेल की संभावनाओं को टटोलने के लिए सर्वेक्षण करने हेतु चिट्ठी भेज कर अनुरोध किया गया है। शिबू सोरेन के पुत्र सह झामुमो विधायक हेमंत सोरेन के मुताबिक 'गुरुजी' इस भावी परियोजना को लेकर काफी आशान्वित हैं, और वे इस दिशा में जल्द से जल्द पहल करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उपमुख्यमंत्री रघुवर दास इस दिशा में प्रयासरत हैं।
शहर की प्रतिभा ने ही दिखाई थी दिल्ली मेट्रो को राह
जमशेदपुर : देश में मेट्रो ट्रेन के सफर को 'सक्सेस स्टोरी' बनाने में अहम भूमिका निभाने वालों का जब भी जिक्र होता है तो नाम लिया जाता है डा. ई श्रीधरण व सीबीके राव का। श्रीधरण दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं तो राव दिल्ली मेट्रो में निदेशक (प्रोजेक्ट एंड प्लानिंग) के रूप में सेवा दे चुके हैं। अहम बात यह कि ई. श्रीधरण शनिवार को जमशेदपुर में कदम रखने वाले हैं। सीबीके राव जमशेदपुर में ही पले-बढ़े हैं। जी हां, दिल्ली मेट्रो को राह दिखाने वाले सीबीके राव ने मैकेनेकिल इंजीनियरिंग की पढ़ाई रिजनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी (आरआईटी) से की है। अब जब झारखंड (जमशेदपुर-रांची) मेट्रो ट्रेन शुरू किये जाने की सुगबुगाहट चली है, तो दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड की इस टीम की जरूरत को राज्य सरकार महसूस कर रही है।
मेट्रो एमडी के एक्सएलआरआई आने से बंधी आस
जमशेदपुर : चूंकि शनिवार को दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के निदेशक डा. ई. श्रीधरण एक्सएलआरआई में आयोजित 54वें दीक्षांत समारोह में भाग लेने आ रहे हैं, इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य सरकार की मांग पर दिल्ली मेट्रो झारखंड में दिलचस्पी दिखाएगी और इस बाबत सकारात्मक पहल किए जाएंगे। पहले चरण में सर्वेक्षण का काम किया जाना है।
'मुख्यमंत्री व राज्य सरकार सूबे में मेट्रो रेल शुरू करने को लेकर गंभीर है। इस बाबत केंद्रीय शहरी विकास मंत्री व दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड से सरकार की ओर से विशेष अनुरोध किया गया है।'
हेमंत सोरेन, विधायक, झामुमो
जमशेदपुर : शहर में मेट्रो ट्रेन का सपना सच हो सकता है। सरकार ने अपनी तरफ से इस बाबत पहल कर दी है। 11 मार्च को बाकायदा राज्य झारखंड सरकार की ओर से केंद्रीय शहरी विकास मंत्री जयपाल एस. रेड्डी को एक पत्र लिख कर राज्य में इस बहुप्रतीक्षित मेट्रो रेल सेवा को शुरू करने हेतु सहयोग करने का अनुरोध किया गया है तो वहीं दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड से भी राज्य में मेट्रो रेल की संभावनाओं को टटोलने के लिए सर्वेक्षण करने हेतु चिट्ठी भेज कर अनुरोध किया गया है। शिबू सोरेन के पुत्र सह झामुमो विधायक हेमंत सोरेन के मुताबिक 'गुरुजी' इस भावी परियोजना को लेकर काफी आशान्वित हैं, और वे इस दिशा में जल्द से जल्द पहल करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उपमुख्यमंत्री रघुवर दास इस दिशा में प्रयासरत हैं।
शहर की प्रतिभा ने ही दिखाई थी दिल्ली मेट्रो को राह
जमशेदपुर : देश में मेट्रो ट्रेन के सफर को 'सक्सेस स्टोरी' बनाने में अहम भूमिका निभाने वालों का जब भी जिक्र होता है तो नाम लिया जाता है डा. ई श्रीधरण व सीबीके राव का। श्रीधरण दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं तो राव दिल्ली मेट्रो में निदेशक (प्रोजेक्ट एंड प्लानिंग) के रूप में सेवा दे चुके हैं। अहम बात यह कि ई. श्रीधरण शनिवार को जमशेदपुर में कदम रखने वाले हैं। सीबीके राव जमशेदपुर में ही पले-बढ़े हैं। जी हां, दिल्ली मेट्रो को राह दिखाने वाले सीबीके राव ने मैकेनेकिल इंजीनियरिंग की पढ़ाई रिजनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी (आरआईटी) से की है। अब जब झारखंड (जमशेदपुर-रांची) मेट्रो ट्रेन शुरू किये जाने की सुगबुगाहट चली है, तो दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड की इस टीम की जरूरत को राज्य सरकार महसूस कर रही है।
मेट्रो एमडी के एक्सएलआरआई आने से बंधी आस
जमशेदपुर : चूंकि शनिवार को दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के निदेशक डा. ई. श्रीधरण एक्सएलआरआई में आयोजित 54वें दीक्षांत समारोह में भाग लेने आ रहे हैं, इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य सरकार की मांग पर दिल्ली मेट्रो झारखंड में दिलचस्पी दिखाएगी और इस बाबत सकारात्मक पहल किए जाएंगे। पहले चरण में सर्वेक्षण का काम किया जाना है।
'मुख्यमंत्री व राज्य सरकार सूबे में मेट्रो रेल शुरू करने को लेकर गंभीर है। इस बाबत केंद्रीय शहरी विकास मंत्री व दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड से सरकार की ओर से विशेष अनुरोध किया गया है।'
हेमंत सोरेन, विधायक, झामुमो
सेंदरा- कानून के दायरे को परंपरा की चुनौती
भादो माझी, जमशेदपुर : जानवर घट रहे हैं, वन क्षेत्र भी सिकुड़ते जा रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर आदिवासी समुदाय ने सेंदरा का शंखनाद कर दिया है। एक ऐसे पारंपरिक पर्व का शंखनाद जिसे मनाया ही जाता है वन्य जीवों का शिकार करने के लिए। ऐसे में अब वन विभाग की नींद उड़ गई है।
आदिवासी सदियों की अपनी परंपरा छोड़ना नहीं चाहते और वन विभाग अपनी आंखों के सामने जानवरों का शिकार होने नहीं देना चाहता, ऐसे में अब परंपरा बनाम प्रशासन की जंग शुरू हो चुकी है। सेंदरा के मसले पर आदिवासी परंपरा और कानून (प्रशासन) के बीच कभी न खत्म होने वाली यह जंग लंबे समय से चल रही है। आदिवासी अपनी सदियों पुरानी परंपरा की दुहाई देकर सेंदरा बंद नहीं करना चाहते और वन विभाग कानून का हवाला देकर सेंदरा होने नहीं देना चाहता।
भुलाई नहीं जा सकती परंपरा
झामुमो विधायक चंपाई सोरेन सेंदरा के बाबत कहते हैं कि परंपरा जमाने से चलती आ रही है, और चूंकि आदिवासी समुदाय अब परंपरा को संयमित तरीके से मनाने को तैयार है, इसलिए सेंदरा को लेकर किसी तरह का विवाद उत्पन्न नहीं किया जाना चाहिए। वहीं झामुमो विधायक रामदास सोरेन कहते हैं कि आदिवासी समुदाय कानून का सम्मान करता है, लेकिन परंपरा से समझौता करना भी समुदाय के लिए संभव नहीं।
गांव-गांव भेजे गए 'गिरा साकाम'
सेंदरा की तिथि निर्धारित हो चुकी है, लेकिन फिलहाल इसे वन विभाग की तैयारियों को मद्देनजर रखते हुए गुप्त रखा गया है। दोलमा बुरु सेंदरा समिति के सदस्य डा. छोटे हेम्ब्रम ने बताया कि गांव-गणराज्यों को सेंदरा के लिए आमंत्रण देने हेतु संदेश पत्र (गिरा साकाम) भेज दिया गया है, जिसकी गांठ 14 तारीख को समाप्त होगी, उसी दिन सेंदरा की तिथि सार्वजनिक कर दी जाएगी।
अप्रैल के अंतिम हफ्ते में होगा सेंदरा
सेंदरा के लिए दलमा जंगल में चढ़ाई करने हेतु मार्च महीने की अंतिम हफ्ते की तिथि निर्धारित की गई है। दोलमा बुरु सेंदरा समिति के प्रमुख सह दोलमा राजा (दलमा के पारंपरिक राजा) राकेश हेम्ब्रम ने इस बाबत गिरा साकाम जारी कर दिया है।
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सेंदरा में शिकार हुए कई वन्यप्राणी
2008 :- वर्ष 08 में 13 मई को सेंदरा (शिकार) किया गया। दोलमा बुरु सेंदरा समिति की औपचारिक जानकारी के मुताबिक इसमें एक मोर, एक हिरण, दो खरगोश व एक मैना समेत कई पक्षी मारे गए।
2009 :- वर्ष 09 में चार मई को सेंदरा किया गया। सेंदरा समिति के मुताबिक इस दौरान चार हिरण, पांच जंगली सुअर, एक कोटरा व एक गिलहरी समेत कई पक्षी मारे गए।
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''आदिवासियों से अपनी परंपरा में लचीलापन लाने के लिए आग्रह किया जा रहा है। इसके लिए सेंदरा समिति के साथ बैठकें भी की जा रही है। जागरूकता ही वन्य जीवों को बचा सकता है। पर्व सांकेतिक भी मन सकता है।''
एटी मिश्रा, डीएओ-धालभूम
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''सेंदरा की परंपरा को अचानक लचीला करना संभव नहीं। आदिवासी समुदाय कोशिश करेगा कि कम वन्यप्राणियों का शिकार हो, लेकिन यह धीरे-धीरे ही संभव है। एक बार में बदलाव संभव नहीं। हम भी जानवरों की अहमियत समझते हैं।''
डा. छोटे हेम्ब्रम, दोलमा बुरु सेंदरा समिति
आदिवासी सदियों की अपनी परंपरा छोड़ना नहीं चाहते और वन विभाग अपनी आंखों के सामने जानवरों का शिकार होने नहीं देना चाहता, ऐसे में अब परंपरा बनाम प्रशासन की जंग शुरू हो चुकी है। सेंदरा के मसले पर आदिवासी परंपरा और कानून (प्रशासन) के बीच कभी न खत्म होने वाली यह जंग लंबे समय से चल रही है। आदिवासी अपनी सदियों पुरानी परंपरा की दुहाई देकर सेंदरा बंद नहीं करना चाहते और वन विभाग कानून का हवाला देकर सेंदरा होने नहीं देना चाहता।
भुलाई नहीं जा सकती परंपरा
झामुमो विधायक चंपाई सोरेन सेंदरा के बाबत कहते हैं कि परंपरा जमाने से चलती आ रही है, और चूंकि आदिवासी समुदाय अब परंपरा को संयमित तरीके से मनाने को तैयार है, इसलिए सेंदरा को लेकर किसी तरह का विवाद उत्पन्न नहीं किया जाना चाहिए। वहीं झामुमो विधायक रामदास सोरेन कहते हैं कि आदिवासी समुदाय कानून का सम्मान करता है, लेकिन परंपरा से समझौता करना भी समुदाय के लिए संभव नहीं।
गांव-गांव भेजे गए 'गिरा साकाम'
सेंदरा की तिथि निर्धारित हो चुकी है, लेकिन फिलहाल इसे वन विभाग की तैयारियों को मद्देनजर रखते हुए गुप्त रखा गया है। दोलमा बुरु सेंदरा समिति के सदस्य डा. छोटे हेम्ब्रम ने बताया कि गांव-गणराज्यों को सेंदरा के लिए आमंत्रण देने हेतु संदेश पत्र (गिरा साकाम) भेज दिया गया है, जिसकी गांठ 14 तारीख को समाप्त होगी, उसी दिन सेंदरा की तिथि सार्वजनिक कर दी जाएगी।
अप्रैल के अंतिम हफ्ते में होगा सेंदरा
सेंदरा के लिए दलमा जंगल में चढ़ाई करने हेतु मार्च महीने की अंतिम हफ्ते की तिथि निर्धारित की गई है। दोलमा बुरु सेंदरा समिति के प्रमुख सह दोलमा राजा (दलमा के पारंपरिक राजा) राकेश हेम्ब्रम ने इस बाबत गिरा साकाम जारी कर दिया है।
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सेंदरा में शिकार हुए कई वन्यप्राणी
2008 :- वर्ष 08 में 13 मई को सेंदरा (शिकार) किया गया। दोलमा बुरु सेंदरा समिति की औपचारिक जानकारी के मुताबिक इसमें एक मोर, एक हिरण, दो खरगोश व एक मैना समेत कई पक्षी मारे गए।
2009 :- वर्ष 09 में चार मई को सेंदरा किया गया। सेंदरा समिति के मुताबिक इस दौरान चार हिरण, पांच जंगली सुअर, एक कोटरा व एक गिलहरी समेत कई पक्षी मारे गए।
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''आदिवासियों से अपनी परंपरा में लचीलापन लाने के लिए आग्रह किया जा रहा है। इसके लिए सेंदरा समिति के साथ बैठकें भी की जा रही है। जागरूकता ही वन्य जीवों को बचा सकता है। पर्व सांकेतिक भी मन सकता है।''
एटी मिश्रा, डीएओ-धालभूम
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''सेंदरा की परंपरा को अचानक लचीला करना संभव नहीं। आदिवासी समुदाय कोशिश करेगा कि कम वन्यप्राणियों का शिकार हो, लेकिन यह धीरे-धीरे ही संभव है। एक बार में बदलाव संभव नहीं। हम भी जानवरों की अहमियत समझते हैं।''
डा. छोटे हेम्ब्रम, दोलमा बुरु सेंदरा समिति
Sunday, January 10, 2010
jamshedpur tribal launches calender
आदिवासियों ने जारी किया अपना कैलेंडर
जमशेदपुर : आदिवासी मुंडा समाज ने रविवार को एक नई पहल की। एक ऐसी पहल जिससे न सिर्फ समुदाय को पहचान मिलेगी बल्कि आदिवासी इतिहास भी समृद्ध होगा। समुदाय द्वारा इस पहल के तहत रविवार को उलीडीह में एक कैलेंडर का लोकार्पण किया गया। इस कैलेंडर के जरिए मुंडा समाज ने धरती आबा बिरसा मुंडा को तो श्रद्धांजलि दी ही, समुदाय के साहित्यिक विकास का मार्ग भी प्रशस्त किया।
आदिवासी हो मुंडा समाज की मानगो शाखा के नेतृत्व में की गई इस पहल को अमली जामा पहनाने के लिए मुंडा समुदाय के युवाओं को काफी मेहनत करनी पड़ी। अंतत: उनकी मेहनत रंग लाई और बिरसा मुंडा की स्मृति में कैलेंडर को तैयार कर लिया गया। रविवार को मुंडा समाज के बुद्धिजीवी वर्ग के जलेन्दर नाग, मंगल सामंत, छोटराय सुलंकी व मानिया शंख सरीखी हस्तियों ने इसका लोकार्पण किया। मानगो (उलीडीह) स्थित आदिवासी हाईस्कूल में हुए लोकार्पण समारोह में आदिवासी समुदाय के बुद्धिजीवियों ने इस दौरान समुदाय विकास के मुद्दे पर मंथन किया। जगदीश मुंडा की सक्रियता से सफल हुए इस लोकार्पण समारोह में आदिवासी अस्तित्व की बात उठी तो भाषा व साहित्य को संजोये रखने के मसले पर भी मंथन हुआ। समारोह में जगदीश मुंडा ने कहा कि आदिवासी समुदाय को भाषा व साहित्य के विकास के लिए व्यापक स्तर पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि अब तक राज्य में जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई की उपेक्षा अच्छे संकेत नहीं दे रहे, इसलिए समुदाय को इस उपेक्षा से लोहा लेने के लिए तैयार रहना होगा। वहीं मौके पर जलेन्दर नाग ने कहा कि आदिवासी समुदाय के युवाओं को जनजातीय साहित्य के विकास हेतु प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कैलेंडर के लोकार्पण को इस दिशा में उठाया गया सराहनीय कदम करार देते हुए कहा कि इस कदम को आगे भी बरकरार रखे जाने की जरूरत है। वहीं इससे पूर्व स्थानीय लोगों द्वारा भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह में रघु सामंत, बुधराम सुलंकी, देवराज मुंडा, हाथीराम मुंडा, मानिया शंख, शिवचरण मुंडा, बबलू बारा, मनोज नाग, बागुन मुंडा, कृष्णा मुंडा, मंगल जोड़ा, गुरुचरण मुंडा आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।
जमशेदपुर : आदिवासी मुंडा समाज ने रविवार को एक नई पहल की। एक ऐसी पहल जिससे न सिर्फ समुदाय को पहचान मिलेगी बल्कि आदिवासी इतिहास भी समृद्ध होगा। समुदाय द्वारा इस पहल के तहत रविवार को उलीडीह में एक कैलेंडर का लोकार्पण किया गया। इस कैलेंडर के जरिए मुंडा समाज ने धरती आबा बिरसा मुंडा को तो श्रद्धांजलि दी ही, समुदाय के साहित्यिक विकास का मार्ग भी प्रशस्त किया।
आदिवासी हो मुंडा समाज की मानगो शाखा के नेतृत्व में की गई इस पहल को अमली जामा पहनाने के लिए मुंडा समुदाय के युवाओं को काफी मेहनत करनी पड़ी। अंतत: उनकी मेहनत रंग लाई और बिरसा मुंडा की स्मृति में कैलेंडर को तैयार कर लिया गया। रविवार को मुंडा समाज के बुद्धिजीवी वर्ग के जलेन्दर नाग, मंगल सामंत, छोटराय सुलंकी व मानिया शंख सरीखी हस्तियों ने इसका लोकार्पण किया। मानगो (उलीडीह) स्थित आदिवासी हाईस्कूल में हुए लोकार्पण समारोह में आदिवासी समुदाय के बुद्धिजीवियों ने इस दौरान समुदाय विकास के मुद्दे पर मंथन किया। जगदीश मुंडा की सक्रियता से सफल हुए इस लोकार्पण समारोह में आदिवासी अस्तित्व की बात उठी तो भाषा व साहित्य को संजोये रखने के मसले पर भी मंथन हुआ। समारोह में जगदीश मुंडा ने कहा कि आदिवासी समुदाय को भाषा व साहित्य के विकास के लिए व्यापक स्तर पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि अब तक राज्य में जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई की उपेक्षा अच्छे संकेत नहीं दे रहे, इसलिए समुदाय को इस उपेक्षा से लोहा लेने के लिए तैयार रहना होगा। वहीं मौके पर जलेन्दर नाग ने कहा कि आदिवासी समुदाय के युवाओं को जनजातीय साहित्य के विकास हेतु प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कैलेंडर के लोकार्पण को इस दिशा में उठाया गया सराहनीय कदम करार देते हुए कहा कि इस कदम को आगे भी बरकरार रखे जाने की जरूरत है। वहीं इससे पूर्व स्थानीय लोगों द्वारा भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह में रघु सामंत, बुधराम सुलंकी, देवराज मुंडा, हाथीराम मुंडा, मानिया शंख, शिवचरण मुंडा, बबलू बारा, मनोज नाग, बागुन मुंडा, कृष्णा मुंडा, मंगल जोड़ा, गुरुचरण मुंडा आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।
Thursday, January 7, 2010
Illegal Mines of kolhan and Tribals of jharkhand
जोहार
अवैध खनन की काली कमाई से तैयार हो रहा 'आतंक का औजार'
कोल्हान में धड़ल्ले से हो रहा अवैध खनन का 'धंधा' न सिर्फ सूबे के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। इस काले धंधे की काली कमाई का बड़ा हिस्सा 'आतंक के औजार' को धार देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। करोड़ों का यह अवैध कारोबार न सिर्फ उग्रवाद और अपराध जगत को वित्तपोषित कर रहा है, बल्कि आतंकवाद के लिए भी फंड मुहैया करा रहा है।
आतंक का पर्याय बने शहर में घटी हालिया आपराधिक घटनाएं कहीं न कहीं इसकी तस्दीक करतीं हैं। पुलिस के मनोबल को तोड़ने का जोखिम उठाते हुए हाल के दिनों में अपराध जगत ने आतंक का ऐसा साम्राज्य कायम करने का दुस्साहस किया कि हर तबका सोचने पर विवश हो गया। वहीं सारंडा (पश्चिमी सिंहभूम) समेत सिंहभूम के बड़े क्षेत्रफल में उग्रवाद का बढ़ता दबदबा भी फंड के लिहाज से पोषक साबित हो रहे इस काले धंधे से 'रेड जोन' तार जोड़ रहा है। अब तो केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी इस बाबत झारखंड सरकार को आगाह कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश की सुरक्षा पर खतरा साबित हो रहे ऐसे अवैध माइंस पर लगाम कसने के लिए सरकार को आवश्यक दिशा निर्देश दिये हैं। इंटेलिजेंस के हवाले से पिछले दिनों यह बात सामने आई कि कोल्हान के पश्चिमी सिंहभूम इलाके में चल रहे आयरन ओर के अवैध माइंस से हो रही काली कमाई का बड़ा हिस्सा आतंक फैलाने के लिए काम कर रहे संगठनों को वित्त मदद देने के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। करोड़ों की इस कमाई से उग्रवाद, अपराध व आतंकवाद को मदद पहुंचाई जा रही है।
इंडियन ब्यूरों आफर माइंस द्वारा किये गये छापेमारी व निरीक्षण में भी यह बात सामने आ चुकी है कि झारखंड में अयरन और के अवैध कारोबार काफी फल-फुल रहा है। सिर्फ सिंहभूम से ही हर साल खनन व भूतत्व विभाग को राजस्व में 106 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है। जबकि पूरे राज्य में इसके कारण 600 करोड़ का नुकसान हो रहा है। इंडियन ब्यूरो आफ माइंस के मुताबिक देश में छह महीने में 21,457 अवैध माइंस का पता चला । सहज समझा जा सकता है कि इसका कारोबार कितना राजस्व हवा कर देता होगा। बात कोल्हान कि। यहां (नुआमुंडी) से हर रात अवैध तरीके से आयरन ओर लदे 5000 ट्रक निकलते हैं, जो पारादीप पोर्ट (उड़ीसा) के लिए रवना होते हैं। यही कारण है कि 09 दिसंबर में उड़ीसा स्टील व माइंस सचिव अशोक महादेव द्वारा एक पत्र लिख कर झारखंड माइंस एंड जियोलाजी सचिव से संयुक्त अभियान छेड़ कर आयरन और के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए चेकिंग पोस्ट लगाने हेतु सहयोग मांगा गया। इसमें दोनों राज्यों को सफलता मिली भी, लेकिन अवैध धंधा इतने से रुकने वाला नहीं था, सो अब भी बरकरार है। इस अभियान के दौरान झारखंड के समीवर्ती इलाके (उड़ीसा) में 128 अवैध माइंस को बंद कराया गया तो 400 से भी अधिक ऐसे स्थानों का पता चलाया गया जहां आयरन ओर अनलोड कर उनका काला धंधा किया जाता है।
चूंकि मुआमुंडी आयरन ओर का खजाना है, और मात्र यहों से प्रतिदिन 70000 टन आयरन ओर का ट्रांसपोर्ट होता है, इसलिए यहां इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा आकार होने की आशंका है।
झारखं में सरकार की दशा व दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले इस काले धंधे के संदर्भ में आपनी टिप्पणी आपेक्षित है।
अवैध खनन की काली कमाई से तैयार हो रहा 'आतंक का औजार'
कोल्हान में धड़ल्ले से हो रहा अवैध खनन का 'धंधा' न सिर्फ सूबे के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। इस काले धंधे की काली कमाई का बड़ा हिस्सा 'आतंक के औजार' को धार देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। करोड़ों का यह अवैध कारोबार न सिर्फ उग्रवाद और अपराध जगत को वित्तपोषित कर रहा है, बल्कि आतंकवाद के लिए भी फंड मुहैया करा रहा है।
आतंक का पर्याय बने शहर में घटी हालिया आपराधिक घटनाएं कहीं न कहीं इसकी तस्दीक करतीं हैं। पुलिस के मनोबल को तोड़ने का जोखिम उठाते हुए हाल के दिनों में अपराध जगत ने आतंक का ऐसा साम्राज्य कायम करने का दुस्साहस किया कि हर तबका सोचने पर विवश हो गया। वहीं सारंडा (पश्चिमी सिंहभूम) समेत सिंहभूम के बड़े क्षेत्रफल में उग्रवाद का बढ़ता दबदबा भी फंड के लिहाज से पोषक साबित हो रहे इस काले धंधे से 'रेड जोन' तार जोड़ रहा है। अब तो केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी इस बाबत झारखंड सरकार को आगाह कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश की सुरक्षा पर खतरा साबित हो रहे ऐसे अवैध माइंस पर लगाम कसने के लिए सरकार को आवश्यक दिशा निर्देश दिये हैं। इंटेलिजेंस के हवाले से पिछले दिनों यह बात सामने आई कि कोल्हान के पश्चिमी सिंहभूम इलाके में चल रहे आयरन ओर के अवैध माइंस से हो रही काली कमाई का बड़ा हिस्सा आतंक फैलाने के लिए काम कर रहे संगठनों को वित्त मदद देने के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। करोड़ों की इस कमाई से उग्रवाद, अपराध व आतंकवाद को मदद पहुंचाई जा रही है।
इंडियन ब्यूरों आफर माइंस द्वारा किये गये छापेमारी व निरीक्षण में भी यह बात सामने आ चुकी है कि झारखंड में अयरन और के अवैध कारोबार काफी फल-फुल रहा है। सिर्फ सिंहभूम से ही हर साल खनन व भूतत्व विभाग को राजस्व में 106 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है। जबकि पूरे राज्य में इसके कारण 600 करोड़ का नुकसान हो रहा है। इंडियन ब्यूरो आफ माइंस के मुताबिक देश में छह महीने में 21,457 अवैध माइंस का पता चला । सहज समझा जा सकता है कि इसका कारोबार कितना राजस्व हवा कर देता होगा। बात कोल्हान कि। यहां (नुआमुंडी) से हर रात अवैध तरीके से आयरन ओर लदे 5000 ट्रक निकलते हैं, जो पारादीप पोर्ट (उड़ीसा) के लिए रवना होते हैं। यही कारण है कि 09 दिसंबर में उड़ीसा स्टील व माइंस सचिव अशोक महादेव द्वारा एक पत्र लिख कर झारखंड माइंस एंड जियोलाजी सचिव से संयुक्त अभियान छेड़ कर आयरन और के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए चेकिंग पोस्ट लगाने हेतु सहयोग मांगा गया। इसमें दोनों राज्यों को सफलता मिली भी, लेकिन अवैध धंधा इतने से रुकने वाला नहीं था, सो अब भी बरकरार है। इस अभियान के दौरान झारखंड के समीवर्ती इलाके (उड़ीसा) में 128 अवैध माइंस को बंद कराया गया तो 400 से भी अधिक ऐसे स्थानों का पता चलाया गया जहां आयरन ओर अनलोड कर उनका काला धंधा किया जाता है।
चूंकि मुआमुंडी आयरन ओर का खजाना है, और मात्र यहों से प्रतिदिन 70000 टन आयरन ओर का ट्रांसपोर्ट होता है, इसलिए यहां इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा आकार होने की आशंका है।
झारखं में सरकार की दशा व दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले इस काले धंधे के संदर्भ में आपनी टिप्पणी आपेक्षित है।
Sunday, December 20, 2009
jamshedpur
hi, i m bhado majhi (amar dip soren). journalist (DAINIK JAGRAN). from - Telco cross road -20, qrt. no-37. (sarjamdah-nidir tola, ps - parsudih, jamshedpur
Friday, November 27, 2009
xlri summer placement 09, we changed the track
ट्रैक पर आई कंपनियां, नौकरियों की बौछार
-कारपोरेट सेक्टर ने संभलने के दिये संकेत, पैकेज में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि
-आईआईएम की तर्ज पर पीएमआईआर के 120 छात्रों का प्लेसमेंट पांच दिनों में
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भादो माझी, जमशेदपुर : मंदी से उबरने के बाद कारपोरेट कंपनियां एक बार फिर ट्रैक पर वापस आ चुकी हैं। साल भर पहले तक जो कंपनियां मोटी तनख्वाह वाले 'साहबों' को बाहर का रास्ता दिखाने को मजबूर थीं, अब वे ही कंपनियां बिजनेस स्कूलों में नौकरियों की बौछार कर रहीं हैं।
शहर में स्थित विश्वस्तरीय प्रबंधन संस्थान (मैनेजमेंट स्कूल) जेवियर लेबर रिलेशंस इंस्टीट्यूट (एक्सएलआरआई) में समर इंटर्नशिप प्लेसमेंट (एसआईपी) सीजन के दौरान देश-विदेश की बड़ी कंपनियों ने कुछ इसी अंदाज में नौकरियों की बौछार की। आलम यह रहा कि एक्सएलआरआई संस्थान परिसर में पिछले तीन हफ्ते से चल रहे समर इंटर्नशिप प्लेसमेंट में छात्रों को खूब नौकरियां आफर की गईं। संस्थान के कुल 240 छात्रों के लिए देश विदेश की जानी-मानी 81 कारपोरेट कंपनियों ने 273 नौकरियों के आफर दिये। वह भी मोटी तनख्वाह वाले। इस बार सबसे तगड़ी तनख्वाह के मामले में भी संस्थान के छात्रों की बल्ले-बल्ले रही। नोवार्टिस-इंटरनेशनल द्वारा सबसे बड़ा पांच लाख का पैकेज (स्टाइपेंड) दो छात्रों को दिया गया। दोनों को कंपनी के ग्लोबल हेडक्वार्टर में महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है। इस साल का औसत पैकेज 89 हजार रुपये रहा।
शुक्रवार को समर इंटर्नशिप प्लेसमेंट के संबंध में जानकारी देते हुए एक्सएलआरआई प्लेसमेंट सेल के सचिव तुषार वाडेकर ने बताया कि पर्सनल मैनेजमेंट एंड इंडस्ट्रीयल रिलेशंस (पीएमआईआर) की बैच साइज बढ़ाने (60 से 120 किये जाने) के बावजूद इस बार संस्थान में 100 प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ। बैच साइज बड़ा होने का कोई प्रभाव प्लेसमेंट पर नहीं पड़ा। उन्होंने बताया कि कंपनियों ने छात्रों के लिए कुल 273 आफर दिये जो पिछले वर्ष के मुकाबले 27.6 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने बताया कि छात्रों को इस वर्ष का मिला औसत पैकेज (89,000) भी पिछले वर्ष की तुलना में 4.7 प्रतिशत अधिक है। तुषार व मीडिया सेल की गायत्री कृष्णन ने बताया कि इस बार संस्थान के पीएमआईआई के 120 छात्रों को पांच दिनों के भीतर लाक किया गया। लाक किये गये छात्र इन कंपनियों में आठ हफ्ते तक औपचारिक तौर पर इंटर्नशिप करेंगे।
आफर देने वाली प्रमुख कंपनियां
जेपी मोर्गन, गोल्डमैन साच्स, एनएम रोशचिल्ड, हिंदुस्तान यूनिलिवर, मैरिको, केस्ट्रोल, कोलगेट पामोलिव, नेसले, आईटीसी, एस्सार, आदित्य विरला ग्रुप, महिंद्रा एंड महिंद्रा, गोदरेज, भारती ग्रुप, कोका-कोला, डच बैंक, एचएसबीसी, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, आईसीआईसीआई बैंक, सिटीबैंक व एक्सिस बैंक।
-बैच साइज 120 से 240 होने के बावजूद शत प्रतिशत प्लेसमेंट
-240 छात्रों के लिए देश-विदेश की कंपनियों ने दिये 273 आफर
-नोवर्टिस इंटरनेशनल ने दिया पांच लाख का उच्चतम पैकेज
-पिछले साल की 74 कंपनियों के मुकाबले इस बार 81 कंपनियां पहुंची
-मंदी से उबरने के बाद 08 के मुकाबले 27.6 प्रतिशत ज्यादा आफर मिले
-कारपोरेट सेक्टर ने संभलने के दिये संकेत, पैकेज में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि
-आईआईएम की तर्ज पर पीएमआईआर के 120 छात्रों का प्लेसमेंट पांच दिनों में
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भादो माझी, जमशेदपुर : मंदी से उबरने के बाद कारपोरेट कंपनियां एक बार फिर ट्रैक पर वापस आ चुकी हैं। साल भर पहले तक जो कंपनियां मोटी तनख्वाह वाले 'साहबों' को बाहर का रास्ता दिखाने को मजबूर थीं, अब वे ही कंपनियां बिजनेस स्कूलों में नौकरियों की बौछार कर रहीं हैं।
शहर में स्थित विश्वस्तरीय प्रबंधन संस्थान (मैनेजमेंट स्कूल) जेवियर लेबर रिलेशंस इंस्टीट्यूट (एक्सएलआरआई) में समर इंटर्नशिप प्लेसमेंट (एसआईपी) सीजन के दौरान देश-विदेश की बड़ी कंपनियों ने कुछ इसी अंदाज में नौकरियों की बौछार की। आलम यह रहा कि एक्सएलआरआई संस्थान परिसर में पिछले तीन हफ्ते से चल रहे समर इंटर्नशिप प्लेसमेंट में छात्रों को खूब नौकरियां आफर की गईं। संस्थान के कुल 240 छात्रों के लिए देश विदेश की जानी-मानी 81 कारपोरेट कंपनियों ने 273 नौकरियों के आफर दिये। वह भी मोटी तनख्वाह वाले। इस बार सबसे तगड़ी तनख्वाह के मामले में भी संस्थान के छात्रों की बल्ले-बल्ले रही। नोवार्टिस-इंटरनेशनल द्वारा सबसे बड़ा पांच लाख का पैकेज (स्टाइपेंड) दो छात्रों को दिया गया। दोनों को कंपनी के ग्लोबल हेडक्वार्टर में महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है। इस साल का औसत पैकेज 89 हजार रुपये रहा।
शुक्रवार को समर इंटर्नशिप प्लेसमेंट के संबंध में जानकारी देते हुए एक्सएलआरआई प्लेसमेंट सेल के सचिव तुषार वाडेकर ने बताया कि पर्सनल मैनेजमेंट एंड इंडस्ट्रीयल रिलेशंस (पीएमआईआर) की बैच साइज बढ़ाने (60 से 120 किये जाने) के बावजूद इस बार संस्थान में 100 प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ। बैच साइज बड़ा होने का कोई प्रभाव प्लेसमेंट पर नहीं पड़ा। उन्होंने बताया कि कंपनियों ने छात्रों के लिए कुल 273 आफर दिये जो पिछले वर्ष के मुकाबले 27.6 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने बताया कि छात्रों को इस वर्ष का मिला औसत पैकेज (89,000) भी पिछले वर्ष की तुलना में 4.7 प्रतिशत अधिक है। तुषार व मीडिया सेल की गायत्री कृष्णन ने बताया कि इस बार संस्थान के पीएमआईआई के 120 छात्रों को पांच दिनों के भीतर लाक किया गया। लाक किये गये छात्र इन कंपनियों में आठ हफ्ते तक औपचारिक तौर पर इंटर्नशिप करेंगे।
आफर देने वाली प्रमुख कंपनियां
जेपी मोर्गन, गोल्डमैन साच्स, एनएम रोशचिल्ड, हिंदुस्तान यूनिलिवर, मैरिको, केस्ट्रोल, कोलगेट पामोलिव, नेसले, आईटीसी, एस्सार, आदित्य विरला ग्रुप, महिंद्रा एंड महिंद्रा, गोदरेज, भारती ग्रुप, कोका-कोला, डच बैंक, एचएसबीसी, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, आईसीआईसीआई बैंक, सिटीबैंक व एक्सिस बैंक।
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