Wednesday, March 31, 2010

shibu sorens polevtical stunt

जनता जहां से चाहेगी, वहां से उतरेंगे : शिबू

जागरण कार्यालय, जमशेदपुर : मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने कहा है कि राज्य में पंचायत चुनाव शीघ्र कराए जाएंगे। इसके लिए सरकार ने अपने स्तर पर पूरी तैयारी कर ली है। संभावना जताई कि आगामी तीन महीने में पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच जाएगी और चुनाव कराने का रास्ता साफ हो जाएगा।
सोमवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष सह विधायक चंपई सोरेन के पुत्र के विवाह समारोह में शिरकत करने राजनगर के जिलिंजगोड़ा गांव पहुंचे शिबू सोरेन ने इस दौरान पेसा कानून के तहत पंचायत चुनाव कराये जाने के बाबत पूछे गये सवाल को टालते हुए सिर्फ इतना कहा कि जो जनहित में होगा, उसी आधार पर सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ही राज्य में पंचायत चुनाव कराए जाएंगे।
 इस दौरान चंपई के पुत्र सिमल सोरेन व पुत्रवधु जयमनी हेम्ब्रम को आशीर्वाद देने के पश्चात मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव लड़ने के मसले पर कहा कि इस बार वे कहीं से भी लड़ें जीत सुनिश्चित है। वे किसी भी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं, जनता जहां से उन्हें उतारना चाहेगी, वे वहीं से चुनाव लड़ेंगे। मुख्यमंत्री हेलीकाप्टर से सीधे चंपई सोरेन के गांव जिलिंजगोड़ा (राजनगर) पहुंचे थे। इस दौरान गांव में सुरक्षा के दृष्टिकोण से व्यापक इंतजाम किये गये थे।
चंपई के पुत्र व पुत्रवधु को पुष्पगुच्छ भेंट करने के बाद उन्होंने उनके सफल वैवाहिक जीवन की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री का आदिवासी परंपरा के मुताबिक स्वागत किया गया। पैर धोकर उनकी खातिर की गई तो पीली धोती भेंट कर शादी समारोह में पारंपरिक रूप से शामिल भी किया गया। मुश्किल से आधे घंटे के लिए जिलिंजगोड़ा में रुके शिबू सोरेन ने शादी समारोह में मजाक ही मजाक में चंपई को अपने बुरे वक्त का साथी बताते हुए हमेशा उनका ऋणी रहने की बात कही। शादी समारोह में मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री रघुवर दास व विधायक हेमंत सोरेन भी जिलिंजगोड़ा पहुंचे थे।

Friday, March 26, 2010

jamshedpur - सच हो सकता मेट्रो ट्रेन का सपना

 -शहर के इंजीनियर संभाल चुके हैं दिल्ली मेट्रो की कमान
जमशेदपुर : शहर में मेट्रो ट्रेन का सपना सच हो सकता है। सरकार ने अपनी तरफ से इस बाबत पहल कर दी है। 11 मार्च को बाकायदा राज्य झारखंड सरकार की ओर से केंद्रीय शहरी विकास मंत्री जयपाल एस. रेड्डी को एक पत्र लिख कर राज्य में इस बहुप्रतीक्षित मेट्रो रेल सेवा को शुरू करने हेतु सहयोग करने का अनुरोध किया गया है तो वहीं दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड से भी राज्य में मेट्रो रेल की संभावनाओं को टटोलने के लिए सर्वेक्षण करने हेतु चिट्ठी भेज कर अनुरोध किया गया है। शिबू सोरेन के पुत्र सह झामुमो विधायक हेमंत सोरेन के मुताबिक 'गुरुजी' इस भावी परियोजना को लेकर काफी आशान्वित हैं, और वे इस दिशा में जल्द से जल्द पहल करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उपमुख्यमंत्री रघुवर दास इस दिशा में प्रयासरत हैं।
शहर की प्रतिभा ने ही दिखाई थी दिल्ली मेट्रो को राह 
जमशेदपुर : देश में मेट्रो ट्रेन के सफर को 'सक्सेस स्टोरी' बनाने में अहम भूमिका निभाने वालों का जब भी जिक्र होता है तो नाम लिया जाता है डा. ई श्रीधरण व सीबीके राव का। श्रीधरण  दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं तो राव दिल्ली मेट्रो में निदेशक (प्रोजेक्ट एंड प्लानिंग) के रूप में सेवा दे चुके हैं। अहम बात यह कि ई. श्रीधरण शनिवार को जमशेदपुर में कदम रखने वाले हैं। सीबीके राव जमशेदपुर में ही पले-बढ़े हैं। जी हां, दिल्ली मेट्रो को राह दिखाने वाले सीबीके राव ने मैकेनेकिल इंजीनियरिंग की पढ़ाई रिजनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी (आरआईटी) से की है। अब जब झारखंड (जमशेदपुर-रांची) मेट्रो ट्रेन शुरू किये जाने की सुगबुगाहट चली है, तो दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड की इस टीम की जरूरत को राज्य सरकार महसूस कर रही है।
मेट्रो एमडी के एक्सएलआरआई आने से बंधी आस
जमशेदपुर : चूंकि शनिवार को दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के निदेशक डा. ई. श्रीधरण एक्सएलआरआई में आयोजित 54वें दीक्षांत समारोह में भाग लेने आ रहे हैं, इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य सरकार की मांग पर दिल्ली मेट्रो झारखंड में दिलचस्पी दिखाएगी और इस बाबत सकारात्मक पहल किए जाएंगे। पहले चरण में सर्वेक्षण का काम किया जाना है।
'मुख्यमंत्री व राज्य सरकार सूबे में मेट्रो रेल शुरू करने को लेकर गंभीर है। इस बाबत केंद्रीय शहरी विकास मंत्री व दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड से सरकार की ओर से विशेष अनुरोध किया गया है।'
हेमंत सोरेन, विधायक, झामुमो

सेंदरा- कानून के दायरे को परंपरा की चुनौती

भादो माझी, जमशेदपुर : जानवर घट रहे हैं, वन क्षेत्र भी सिकुड़ते जा रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर आदिवासी समुदाय ने सेंदरा का शंखनाद कर दिया है। एक ऐसे पारंपरिक पर्व का शंखनाद जिसे मनाया ही जाता है वन्य जीवों का शिकार करने के लिए। ऐसे में अब वन विभाग की नींद उड़ गई है।
आदिवासी सदियों की अपनी परंपरा छोड़ना नहीं चाहते और वन विभाग अपनी आंखों के सामने जानवरों का शिकार होने नहीं देना चाहता, ऐसे में अब परंपरा बनाम प्रशासन की जंग शुरू हो चुकी है। सेंदरा के मसले पर आदिवासी परंपरा और कानून (प्रशासन) के बीच कभी न खत्म होने वाली यह जंग लंबे समय से चल रही है। आदिवासी अपनी सदियों पुरानी परंपरा की दुहाई देकर सेंदरा बंद नहीं करना चाहते और वन विभाग कानून का हवाला देकर सेंदरा होने नहीं देना चाहता।
भुलाई नहीं जा सकती परंपरा
झामुमो विधायक चंपाई सोरेन सेंदरा के बाबत कहते हैं कि परंपरा जमाने से चलती आ रही है, और चूंकि आदिवासी समुदाय अब परंपरा को संयमित तरीके से मनाने को तैयार है, इसलिए सेंदरा को लेकर किसी तरह का विवाद उत्पन्न नहीं किया जाना चाहिए। वहीं झामुमो विधायक रामदास सोरेन कहते हैं कि आदिवासी समुदाय कानून का सम्मान करता है, लेकिन परंपरा से समझौता करना भी समुदाय के लिए संभव नहीं।
गांव-गांव भेजे गए 'गिरा साकाम'
सेंदरा की तिथि निर्धारित हो चुकी है, लेकिन फिलहाल इसे वन विभाग की तैयारियों को मद्देनजर रखते हुए गुप्त रखा गया है। दोलमा बुरु सेंदरा समिति के सदस्य डा. छोटे हेम्ब्रम ने बताया कि गांव-गणराज्यों को सेंदरा के लिए आमंत्रण देने हेतु संदेश पत्र (गिरा साकाम) भेज दिया गया है, जिसकी गांठ 14 तारीख को समाप्त होगी, उसी दिन सेंदरा की तिथि सार्वजनिक कर दी जाएगी।
अप्रैल  के अंतिम हफ्ते में होगा सेंदरा
सेंदरा के लिए दलमा जंगल में चढ़ाई करने हेतु मार्च महीने की अंतिम हफ्ते की तिथि निर्धारित की गई है। दोलमा बुरु सेंदरा समिति के प्रमुख सह दोलमा राजा (दलमा के पारंपरिक राजा) राकेश हेम्ब्रम ने इस बाबत गिरा साकाम जारी कर दिया है। 
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सेंदरा में शिकार हुए कई वन्यप्राणी

2008 :- वर्ष 08 में 13 मई को सेंदरा (शिकार) किया गया। दोलमा बुरु सेंदरा समिति की औपचारिक जानकारी के मुताबिक इसमें एक मोर, एक हिरण, दो खरगोश व एक मैना समेत कई पक्षी मारे गए।  
2009 :- वर्ष 09 में चार मई को सेंदरा किया गया। सेंदरा समिति के मुताबिक इस दौरान चार हिरण, पांच जंगली सुअर, एक कोटरा व एक गिलहरी समेत कई पक्षी मारे गए।
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''आदिवासियों से अपनी परंपरा में लचीलापन लाने के लिए आग्रह किया जा रहा है। इसके लिए सेंदरा समिति के साथ बैठकें भी की जा रही है। जागरूकता ही वन्य जीवों को बचा सकता है। पर्व सांकेतिक भी मन सकता है।''
एटी मिश्रा, डीएओ-धालभूम
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''सेंदरा की परंपरा को अचानक लचीला करना संभव नहीं। आदिवासी समुदाय कोशिश करेगा कि कम वन्यप्राणियों का शिकार हो, लेकिन यह धीरे-धीरे ही संभव है। एक बार में बदलाव संभव नहीं। हम भी जानवरों की अहमियत समझते हैं।''
डा. छोटे हेम्ब्रम, दोलमा बुरु सेंदरा समिति